RSSB Lab Assistant Biology Notes: कवक (Fungi) - सामान्य लक्षण, वर्गीकरण और पादप रोग (Syllabus Wise)

नमस्ते दोस्तों! क्या आप RSSB Lab Assistant Exam (प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा) की तैयारी कर रहे हैं? अगर हाँ, तो आज का यह आर्टिकल आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जीव विज्ञान (Biology) के सिलेबस में 'कवक (Fungi)' एक ऐसा टॉपिक है जिससे परीक्षा में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर कवकों के वर्गीकरण और उनसे होने वाले पादप रोगों के बारे में।

इस पोस्ट में हम RSSB Lab Assistant Syllabus के अनुसार कवक के सामान्य लक्षण, माइकोलॉजी (Mycology), विस्तृत वर्गीकरण और विभिन्न फसलों में होने वाले कवक जनित रोगों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। ये नोट्स सरल हिंदी भाषा में तैयार किए गए हैं ताकि आप कम समय में बेहतरीन रिवीजन कर सकें। चलिए, विस्तार से जानते हैं कवक के बारे में।


कवक (Fungi) कवक शब्द का उद्गम लैटिन भाषा के शब्द फंगस से हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ- मशरूम (छत्रक) है। 

कवक विज्ञान (माइकोलॉजी)- विज्ञान की वह शाखा जिसमे कवकों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। 

कवकों की कुछ वृहद जातियों जैसे मशरूम, मॉरेल, कंड (स्मट), विलगन, किट्ट आदि का ज्ञान मानव को की हजार वर्ष पहले से था किन्तु उसस समय इनकी प्रकृति, उदभव तथा विकास अज्ञात था। 

जीवाश्म अभिलेख, दिवोंनियन् तथा प्रीकैम्ब्रियन् कल्प में इनकी उपस्थिति दर्शाते है। 

कवकों के सामान्य लक्षण: 

  1. कवकों में पर्णहरित का अभाव होता है अतः ये प्रकाश संश्लेषण नहीं करते। 
  2. पादप शरीर धागे समान सरंचनाओ से बना होता है जिन्हे कवक तन्तु (Hyphae) कहते है। 
  3. कवक तन्तु आपस में मिलकर कवकजाल (Mycelium) का निर्माण करते है। 
  4. कवक गरम, नम, छायादार् अथवा काम प्रकाश वाले स्थानों पर पाए जाते है। 
  5. पोषण के आधार पर कवक परजीवी या मृतोंपजीवी होते है। 
  6. कोशिका भित्ति सेल्यूलोज व काइटिन की बनी होती है। 
  7. संचित भोजन वसा व तेल के रूप में होता है। कभी-कभी प्रोटीन व जटिल कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन पाया जाता है।
  8. कवक में अलैंगिक जनन बीजाणुओ द्वारा होता है। लैंगिक जनन संयुग्मी या विषमयुग्मी प्रकार का होता है। 

कवकों का वर्गीकरण- 

  • अधिकांश वर्गीकरण पद्धतियाँ कवक की कायिक सरंचना, अलैंगिक बीजाणुओ के प्रकार, बीजाणुधानी की सरंचना, जीवन चक्र तथा लैंगिक अवस्था की उपस्थिति पर् आधारित है। 
  • कवकों के वर्गीकरण का प्रथम सदंर्भ वाहिन की पीनेक्स थिएट्री बोटिनिसी में मिलता है। इसमे कवकों की लगभग 100 जातियों का उल्लेख है। 
  • टॉनफोर्ट ने अपनी पुस्तक ‘ऐलीमेंटस डी ला बोटेनिक’ में कवकों को 6 वर्गों में विभाजित किया। 
  • लिनीयस ने स्पीशीज़ प्लांटेरम में कवकों का वर्णन क्रिप्टोगेमिया फन्जाई के अंतर्गत किया है। 
  • कवकों का विस्तृत वर्गीकरण सर्वप्रथम एलिआस फ्रिश द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इन्होंने 1821 तथा 1832 के बीच प्रकाशित ‘सिस्टेमा माइकॉलोजीकम’ के तीन खंडों में कवकों को निम्न चार वर्गों में विभाजित किया-

  1. कोनियोंमाईसिटीज 
  2. हाइफ़ोंमाईसिटीज 
  3. गेस्ट्रोमाईसिटीज 
  4. हाइमिनोमाईसिटीज 

सेकार्डों ने अपनी पुस्तक ‘साइलोज फगोरम’ में कवकों को निम्न पाँच वर्गों में विभाजित किया- 

  1. मिक्सोमाईसिटीज (अवपंक कवक) 
  2. फाइकोमाईसिटीज (शैवालीय कवक) 
  3. एस्कोमाईसिटीज (थैलिनुमा कवक- लाइकेन निर्माण में उपयोगी) 
  4. बेसिडिओमाईसिटीज (क्लब फन्जाई) 
  5. ड़यूटेरोमाईसिटीज (अपूर्ण कवक) 

  • ड़यूटेरोमाईसिटीज में सम्मिलित वंशों में लैंगिक जनन की क्षमता नहीं होती है, अतः यह वर्ग अपूर्ण कवकों का वर्ग अथवा फन्जाई इम्परफेक्टाई कहलाता है। 

कवक द्वारा जनित पादप रोग

क्र. स. रोग रोगकारी कवक
1. आलू का पछेती अंगमारी फायटोफथोरा इंफेसटेन्स
2. आलू का काला मस्सा सिन्काइट्रियम एंडोबायोंटिकम्
3. आलू का अंगेती अंगमारी आल्टरनेरिया सोलेनाई
4. क्रूसिफ़र का डाउनी मिल्ड़्यू पेरोनोस्पोरा
5. क्रूसिफ़र का श्वेत किट्ट एल्ब्यूगो केण्डिडा
6. बाजरे का हरित बाली स्कलेरोस्पोरा ग्रेमिनिकोला
7. राई का अरगट एल्ब्यूगो केण्डिडा
8. गेहू का शलथ कंड स्कलेरोस्पोरा ग्रेमिनिकोला
9. गन्ने का लाल गलन क्लेवीसेप्स परप्यूरीया
10. मूंगफली का टिक्का सर्कोस्पोरा (पर्सोंनेटा)
11. चावल की भूरी पर्ण चित्ति हेल्मिन्थोस्पोरियम ओराइजी
12. फसलों की ग्लानियाँ फ़्यूजेरीयम

दोस्तों, यह था RSSB Lab Assistant Biology सिलेबस का एक अति-महत्वपूर्ण टॉपिक 'कवक (Fungi)'। परीक्षा की दृष्टि से ऊपर दी गई कवक जनित पादप रोगों की सारणी (Table) बहुत मायने रखती है, क्योंकि अक्सर मिलान करने वाले प्रश्न (Match the following) या सीधे रोगकारी कवक (Pathogen) के नाम इसी सारणी से पूछे जाते हैं।

हमें उम्मीद है कि ये सिलेबस-वार नोट्स आपकी तैयारी को एक नई दिशा देंगे। अगर आपको यह पोस्ट उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें और भविष्य में अन्य टॉपिक्स पर नोट्स पाने के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो करना न भूलें। अपनी पढ़ाई जारी रखें, शुभकामनाएँ!

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

विज्ञान स्थल के फेसबुक पेज को पसंद करें