नमस्कार दोस्तों! यदि आप RSSB Lab Assistant (प्रयोगशाला सहायक) परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो जीव विज्ञान (Biology) के प्लांट किंगडम खंड में 'ब्रायोफाइटा' एक अत्यंत महत्वपूर्ण टॉपिक है। परीक्षा में अक्सर ब्रायोफाइट्स के आवास, उनके जननांगों और उनके विशिष्ट नामों से प्रश्न पूछे जाते हैं।
आज की इस विशेष पोस्ट में हम सिलेबस के अनुसार ब्रायोफाइटा के उन सभी पहलुओं को कवर करेंगे जो आगामी परीक्षा के लिए उपयोगी हैं। इसमें पादप जगत के उभयचरों की संरचना से लेकर उनके वर्गीकरण तक की पूरी जानकारी सरल हिंदी भाषा में दी गई है। आइए, इन महत्वपूर्ण नोट्स का अध्ययन करते हैं:
- ब्रायोफाइटा शब्द रॉबर्ट ब्रान ने दिया। ब्रायोन एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ है- मॉस।
- ब्रान ने ब्रायोफाइटा में शैवाल, कवक, लाइकेन तथा मॉस को सम्मिलित किया था।
- वर्तमान में ब्रायोफाइट्स पादप जगत के सरलतम स्थलीय पादप है जिनमे लिवेरवर्टस व मॉस को सम्मिलित किया जाता है।
- ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है क्योंकि जीवनचक्र को पूरा करने के लिए जल अनिवार्य होता है।
- एफ. केवर्स को ब्रायोलॉजी का जनक कहा जाता है। एस. आर. कश्यप को भारतीय ब्रायोलॉजी का जनक कहा जाता है।
- ब्रायोफाइट्स एम्ब्रायोंफाइटा जगत के आद्यतम (primitive) पादप है। ब्रायोफाइट्स यद्यपि प्रथम स्थलीय पादप है परंतु वे कभी भी भूमि की प्रमुख वनस्पति नहीं बन सके, अतः उन्हे प्रथम सफल स्थलीय पादप नहीं कहा जा सकता।
- ब्रायोफाइट्स उत्पत्ति में शैवालो तथा टेरिडोफाइट्स से समानता दर्शाते है।
आवास-
- ये नम, छायादार व ठंडे स्थानों पर् पाए जाते है। जैसे- छायादार मैदानों, आर्द्र चट्टानों, वृक्षों के स्तंभों, दीवारों, दलदल भूमि।
- पश्चिमी हिमालय को ब्रायोफाइट्स की स्वर्ण खान कहा जाता है।
- कुछ ब्रायोफाइट्स जलीय भी होते है। जैसे- रिक्सिया फ़्ल्यूटेंस, रिक्सिया आबुएन्सिस, रिक्सिओकार्पस नेटेंस, राऐला स्फेग्नम की कुछ जातियाँ, फ़ॉन्टेनेलिस आदि।
- राऐला ही जल में जीवन चक्र पूरा करने के लिए अनुकूलित होती है।
- अधिकांश ब्रायोफाइट्स स्वयपोषी होते है परंतु क्रिप्टोथैलस मिराबिलिस, बक्सबॅामिया, एफ़िला, मृतजीवी के रूप में पाए जाते है।
- जूऑप्सिस आर्जेन्टिआ सूक्ष्मतम ब्रायोफाइट है। सबसे बड़ा ब्रायोफाइट डाँसोनिया है।
पादप शरीर-
- पादप युग्मकोंद्भिद होता है। शरीर सुकायक अथवा पर्णिल प्रकार का होता है। सुकायक शरीर में जड़, तना तथा पत्तियों में विभेदन नहीं पाया जाता है। यह प्रायः श्यान, चपटे, पृष्ठधारी अग्र व पश्च सिरे में विभेदित होता है। निचले तल पर रोम सदृश्य मुलाभासी गुच्छ पाया जाता है।
- ब्रायोफाइट्स के स्तम्भ व पत्तियाँ युग्मकोंद्भिद होने के कारण संवहनी पादपों के तने व पत्तियों के समजात नहीं होते।
- मूलाभास मूल की अनानुजात संरचनाएँ (analogus organ) है जो जड़ों के समान कार्य करती है। ये समतली अथवा गुलकीय भित्ति होते है। मॅास के मूलाभास बहुकोशिय, तिरछे पटयुक्त समतली भित्ति वाले एवं शाखित पाए जाते है।
- सुकाय प्रायः द्विभाजी शाखित (dichotomously branched) पाया जाता है। ब्रायोफाइट्स बहुकोशिय होते है ओर ऊत्तक विभेदन पाया जाता है।
- संवहन ऊत्तको का अभाव होता है। इसलिए इन्हे असंवहनी एम्ब्रियोंफाइट कहते है।
- लीवरवर्ट में कोशिका भित्ति सेल्यूलोस व पेक्टोज की तथा मॉस में हेमीसेल्यूलॉस एवं पेंटोंजन की बनी होते है।
- संचित भोजन स्टार्च के रूप में पाया जाता है। वृद्धि अग्रस्थ कोशिका की सक्रियता से होती है।
ब्रायोफाइटा का वर्गीकरण
आइक्लर ने ब्रायोफाइटा को दो वर्गों में बांटा है- 1. हेपेटिसी 2. मसाई/मॉसेस
एंगलर ने ब्रायोफाइटा के प्रत्येक वर्ग को तीन गणों में बांटा है। यह सबसे प्रचलित वर्गीकरण है।
| ब्रायोफाइटा (डिवीजन) | 1. हेपेटिसी | (i) मार्केन्शिएलीज |
| (ii) जन्गरमैनिएलीज | ||
| (iii) एंथोसिरोंटेलीज | ||
| 2. मसाई/मॉसेस | (i) स्फैग्नेलीज | |
| (ii) एण्ड़्रिएलीज | ||
| (iii) ब्रायेलीज |
ब्रायोफाइटा में जनन
इसमे जनन कायिक तथा लैंगिक विधियों से होता है-
- कायिक जनन- यह थैलस के पुराने भागों के गलने अथवा मृत्यु, अपस्थानिक शाखाओ द्वारा अथवा विशेष संरचना कंद, जेमा (Gemma) द्वारा होता है।
- लैंगिक जनन- इनमे विषम युग्मकी जनन होता है।
- नर जननांग- इसे पुंधानी (antheridium) कहते है, यह सवृंत बहुकोशिकीय होती है इसके चारों ओर बंधमय कोशिकाओ का आवरण पाया जाता है। इस आवरण के भीतर अनेक पुंकोशिकाये (Androcytes) होती है ओर प्रत्येक पुंकोशिका से एक पुमणु (Antherozoid) बनता है।
- स्त्री जननांग- इसे स्त्रीधानी (Archegonium) कहते है, यह फ्लास्क जैसी बहुकोशिकीय होती है। इसका आधार भाग फूला हुआ होता है इसे अंडधा (Venter) तथा ऊपरी दीर्घित भाग (neck) कहलाता है।
- ब्रायोफाइटा में भ्रूण का विकास स्त्रीधानी में ही होता है।
- इसमे जनन के लिए जल आवश्यक है।
- इनमे पीढ़ी एकान्तरण पाया जाता है अर्थात् युग्मकोंद्भिद और बीजाणुद्भिद अवस्था पाई जाती है।
- बीजाणुद्भिद अवस्था पूर्णरूप से युग्मकोंद्भिद पर आश्रित है।
ब्रायोफाइट्स के सामान्य नाम
| स्फैग्नम | पीट मॉस, ट्रफ मॉस, बॉग मॉस |
| पोलीट्राइकम | हेयर केप मॉस |
| फ्यूनेरिया | हरी मॉस, कार्ड मॉस |
| फॉन्टीनेलिस | ब्रुक मॉस |
| एंथोसिरॉस | हॉर्न वॉर्ट |
| एन्ड्रिया | ग्रेनाइट मॉस |
| क्लेडोनिया रेन्जिफेरा | रेन्डियर मॉस |
दोस्तों, आशा है कि RSSB Lab Assistant के सिलेबस पर आधारित ब्रायोफाइटा के ये नोट्स आपकी तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। विशेष रूप से स्फैग्नम और फ्यूनेरिया जैसे पौधों के सामान्य नाम और उनके वर्गीकरण को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि परीक्षा में इनसे प्रश्न आने की प्रबल संभावना रहती है।
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