नमस्कार दोस्तों! यदि आप RSSB Lab Assistant Exam (प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा) की तैयारी कर रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जीव विज्ञान (Biology) के सिलेबस में 'शैवाल (Algae)' एक अहम हिस्सा है और इससे जुड़े प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम 'शैवालों के वर्गीकरण (Classification of Algae)' को सिलेबस के अनुसार विस्तार से समझेंगे। शैवालों को किन आधारों पर बांटा गया है और एफ. ई. फ्रिश (F.E. Fritsch) का इसमें क्या योगदान है, यह सब इन हस्तलिखित नोट्स में सरल भाषा में समझाया गया है। चलिए, अपने टॉपिक की शुरुआत करते हैं।
शैवालों का वर्गीकरण शैवालों के वर्गीकरण के लिए निम्नलिखित लक्षणों को प्रमुख आधार बनाया गया है-
- प्रकाश संश्लेषणी वर्णको का संगठन व उनकी विविध मात्राऐ
- संचित भोजन के प्रकार
- कोशिका भित्ति के विभिन्न अवयव
- कशाभिकों की उपस्थिति/ अनुपस्थिति, संख्या, स्थिति, व प्रकार
- कोशिका संगठन (प्रोकेरिओटिक/ यूकेरिओटिक)
- प्रजनन विधियां
- जीवन चक्र
उपर्युक्त लक्षणों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण वर्णको के प्रकार व उनकी विभिन्न मात्राऐ है जिनके आधार पर शैवालों को अनेकों वर्षों तक चार प्रमुख वर्गों में विभक्त किए रखा गया। ये वर्ग इस प्रकार थे-
- सायनोफायसी – नील हरित शैवाल
- क्लोरोफायसी – हरित शैवाल
- फियोफायसी – भूरे शैवाल
- रोडोंफायसी – लाल शैवाल
एफ. ई. फ्रिश (Father of Phycology) ने 1935 में शैवालों को वर्गीकृत किया। उनके वर्गीकरण का आधार वर्णक, संचित भोजन, कशाभिकाए, शैवालों की आकारिकी, एवं प्रजनन विधिया थी।
उनका वर्गीकरण शैवालों को एक विभाग के रूप में मानकर जीवित सदस्यों को 11 वर्गों में व जीवाश्मीय सदस्यों को 12वें वर्ग में विभक्त करता है। जो निम्न सारणी मे दिया गया है।
| क्र. सं. | वर्ग | सामान्य नाम | प्रमुख वर्णक | संचित भोजन | कशाभिक | कोशिका भित्ति अवयव | लैंगिक जनन |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1. | क्लोरोफाइसी | हरित शैवाल | क्लोरोफिल | स्टार्च पायरेनाइड उपस्थित | समान, 2-4 अग्रस्थ | सेल्लुलोस व पेक्टिन | सम/ असम/ विषमयुग्मकी |
| 2. | जेन्थोफायसी | पीत-हरित शैवाल | जेन्थोफिल व क्लोरोफिल | तेल व ल्यूकोसीन पायरेनाइड अनुपस्थित | असमान, दो कूर्च व प्रतोद, परिधि पर/ अग्रस्थ | सेल्लुलोस व पेक्टिन (क्लोरोफाइसी के पेक्टिन से अधिक) | अनुपस्थित, यदाकदा समयुग्मकी |
| 3. | क्राइसोफायसी | भूरे-नारंगी शैवाल (अधिकांश कशाभिकीय) | फ्राइकोक्राइसिस नामक जेन्थोफिल | तेल व ल्यूकोसीन | समान, 1-2 अग्रस्थ | सेल्लुलोस व पेक्टिन, सिलिका कभी कभी अनुपस्थित | अनुपस्थित, यदाकदा समयुग्मकी |
| 4. | बेसिलेरिओफायसी | सुनहरे भूरे शैवाल (डायटम्स) | डायटोमिन व अन्य जेन्थोफिल | तेल, ल्यूकोसीन, वोलयुटिन कण, पायरेनाइड उपस्थित | अपवाद रूप मे उपस्थि, असमान 1-2 कूर्च अग्रस्थ | पेक्टिन, सिलिका | सम/ असम/ विषमयुग्मकी |
| 5. | क्रिप्टोफायसी | भूरे/लाल शैवाल | जेन्थोफिल (जियाजेन्थिन) x-फाइकोइरिथ्रिन | स्टार्च, तेल | असमान, दो कूर्च व प्रतोद, अग्रस्थ | सेल्लुलोस व पेक्टिन, कभी कभी अनुपस्थित | अनुपस्थित |
| 6. | डाइनोफायसी (पायरोंफायसी) | पीले/भूरे शैवाल (डायनोंफ्लेजीलेट्स) प्रायः एक कोशिकीय | केरोटीन्स पेरिडिनिन व अन्य जेन्थोफिल | ठोस कार्बोहाइड्रेट, स्टार्च, तेल | असमान, दो कूर्च व प्रतोद, अग्रस्थ | सेल्लुलोस व पेक्टिन, कभी कभी अनुपस्थित | अनुपस्थित, यदाकदा समयुग्मकी |
| 7. | क्लोरोमोनेडीनो | चमकदार हरे शैवाल (एककोशिकीय कशाभिकीय शैवाल) | क्लोरोफिल | तेल | समान, दो अग्रस्थ | सेल्लुलोस व पेक्टिन, कभी कभी अनुपस्थित | अनुपस्थित |
| 8. | युग्लेनीडी | हरे शैवाल (एककोशिकीय) | क्लोरोफिल | पेरामाइलम, स्टार्च, तेल | 1,2,3 अग्रस्थ, प्रतोद | अनुपस्थित, पेलीकल आवरण | अनुपस्थित, यदाकदा समयुग्मकी |
| 9. | फियोंफायसी | भूरे शैवाल (तंतुकी/विशालकाय/मृदुत्तकी केल्प) | फ्युकोजैन्थीन नामक जेन्थोफिल | लेमिनेरिन, स्टार्च, मेनीटॉल, ऐल्कहॉल, वसा व पायरेनाइड उपस्थित | असमान, दो पार्श्वीय, कूर्च व प्रतोद, कभी-कभी एक | सेल्लुलोस, ऐल्जिन,फ्यूकोइडिन | सम/ असम/ विषमयुग्मकी |
| 10. | रोडोंफायसी | लाल शैवाल (तंतुकी/मृदुत्तकी शैवाल) | R-फाइकोइरिथ्रिन | फ्लोरिडियन, स्टार्च, गैलेक्टोसाइड, फ्लोरिडोसाइड, पायरेनाइड उपस्थित | अनुपस्थित | जाइलन्स, पोलीमेन्नोज़, पोलीगेलेक्टोस एस्टर, सेल्यलोस | विषमयुग्मकी |
| 11. | सायनोफायसी | नील-हरित शैवाल (एककोशिकीय/ तंतुकी शैवाल) | क्लोरोफिल व फाइकोसायनिन | सायनोफायसियन, स्टार्च | अनुपस्थित | म्युकोपेप्टाइड | अनुपस्थित परालैगिक पुनर्संयोग उपस्थित |
| 12. | निमेटोफायसी | जीवाश्मीय शैवाल जैसे- पेलिओनाइटेला, लैगाइनोफोरा, प्रोटोटेक्सिटीस, ग्रिफिथसिया |
दोस्तों, यह था RSSB Lab Assistant के सिलेबस के अनुसार शैवालों के वर्गीकरण का विस्तृत विवरण। एफ. ई. फ्रिश (Father of Phycology) द्वारा दिया गया यह वर्गीकरण परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए वर्णकों और संचित भोजन के आधार को अच्छे से याद कर लें।
हमें उम्मीद है कि यह नोट्स आपकी तैयारी में मददगार साबित होंगे। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे अपने उन साथियों के साथ जरूर शेयर करें जो Lab Assistant Exam की तैयारी कर रहे हैं। जीव विज्ञान के अन्य टॉपिक्स के सिलेबस-वार नोट्स पाने के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो करें और अपने सवाल या सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। शुभकामनाएँ!


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