Biology Notes: योजक कड़ियाँ (Connecting Links) - परिभाषा और महत्वपूर्ण उदाहरण (in hindi)

नमस्ते दोस्तों! यदि आप किसी भी विज्ञान आधारित प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो 'जैव विकास (Evolution)' एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस विषय में 'योजक कड़ियाँ (Connecting Links)' से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

योजक कड़ियाँ वे जीव या जीवाश्म होते हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि जीवों का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। ये जीव दो अलग-अलग वर्गों के बीच के सेतु (Bridge) का कार्य करते हैं। आज की इस पोस्ट में हम योजक कड़ियों की परिभाषा और 20 से अधिक महत्वपूर्ण उदाहरणों की सूची देखेंगे, जो परीक्षा की दृष्टि से अति आवश्यक हैं।

Connecting-links-yojak-kadi-kya-hai-Connector-hindi-vigyan-sthal
स्रोत- Aleksandra Ostojic
योजक कड़ियाँ विशेष रूप से जीवित जीवधारियों से  संबंधित हैं जो जीवों के दो अलग अलग समूहों की विशेषता को लिए हुए होते है। ऐसे जंतु जिनमे दो समूहों के लाक्षणिक गुण उपस्थित हो, योजक कड़ी कहलाते हैं। 

योजक कड़ी क्या है?

पर्याप्त प्रमाण के आधार पर अब यह सिद्ध कर दिया गया है कि आधुनिक जन्तु जगत का निर्माण किसी दिव्य शक्ति के द्वारा अचानक नही हुआ था। उद्विकास के सिद्धांत के अनुसार आजकल के पादप एवं जन्तु प्रारम्भ से जमीन पर रहने वाले सबसे साधारण जीवों से लंबे किन्तु लगातर क्रमिक परिवर्तन प्रक्रिया से उत्पादित हुए है। इनमे से कई पादप व जन्तु प्राचीन एवं आधुनिक जीवों की क्रमिक एवं निरंतर कड़ी को प्रस्तुत करते है। जिन्हें योजक कड़ी कहा जाता है। 
योजक कड़ी के अधिकतर जीव अपने आप को वातावरण के  अनुकूल ना बना पाने के कारण विलुप्त हो चुके है एवं इनके जीवाश्म एवं वंश के कुछ सदस्य ही शेष है। 
01. सजीव एवं निर्जीव वायरस
02. वायरस तथा बैक्टीरिया रिकेटसिआ
03. बैक्टीरिया तथा फ़न्जाई एक्टीनोमाइसिटिज
04. प्रोटिस्टा तथा फ़न्जाई मिक्सोमाइसिटिज
05. प्रोटिस्टा तथा ब्रायोफाइटा हॉर्नवर्ट्स (मॉस)
06. ब्रायोफाइटा तथा टेरिडोफाइटा क्लब मॉस
07. टेरिडोफाइटा तथा अनावृत्तबीजी साइकस
08. अनावृत्तबीजी तथा आवृत्तबीजी नीटम; Gnetum (ज़िम्नोस्पर्म)
09. पादप एवं जन्तु जगत युग्लिना
10. प्रोटोजोआ तथा मेटाजोआ जिनोटरबेला तथा निमेटोडर्म (चपटे कृमि; Flat worm)
11. प्रोटोजोआ तथा पोरिफेरा प्रोटेरोस्पंज (Proterospongia)
12. सीलेन्ट्रेटा तथा प्लेटीहैल्मिन्थिज टिनोफोरा
13. एनेलिडा तथा मॉलस्का नियोपाइलीना (मॉलस्का)
14. आर्थोपोड़ा तथा एनेलिडा पेरिपेटस (चलन कृमि; Walking worm)
15. इकाइनोडर्म तथा कॉर्डेटा बेलेनोग्लॉसस (हेमी-कॉर्डेटा)
16. प्रोटो–कॉर्डेटा तथा वर्टीब्रेटा इंकटोजॉन (Ainktozoan)
17. मछलियां तथा स्थल वर्टीब्रेटा सीलाकेंथ (Coelacanth)
18. अस्थिल तथा उपास्थिल मछलियां काइमेरा
19. मछली तथा टेट्रापोड़ा लेटिमेरिया (उभयचर)
20. उभयचर तथा सरीसृप स्फीनोडॉन (जीवित जीवाश्म मछली)
21. सरीसृप तथा पक्षी (Aves) आर्कियोप्टेरिक्स (विलुप्त पक्षी)
22. सरीसृप तथा स्तनधारी आर्नीथोरिंकस (डक बिल प्लेटीपस), कंटीला चींटीखोर (Spiny Ant eater)

दोस्तों, यह थी जीव विज्ञान की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण योजक कड़ियाँ (Connecting Links) जो सजीव और निर्जीव से लेकर स्तनधारी और सरीसृप तक के विकास क्रम को दर्शाती हैं। परीक्षाओं में अक्सर सीधे तौर पर पूछा जाता है कि "आर्कियोप्टेरिक्स किन दो वर्गों के बीच की कड़ी है?" या "पेरिपेटस की विशेषता क्या है?"। इसलिए इस सूची को अच्छे से याद कर लें।

हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपके नोट्स और रिवीजन के लिए उपयोगी साबित होगी। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें और विज्ञान विषय के अन्य महत्वपूर्ण नोट्स पाने के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो करना न भूलें। अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। धन्यवाद!

एक टिप्पणी भेजें

3 टिप्पणियाँ

आपकी राय :

विज्ञान स्थल के फेसबुक पेज को पसंद करें